Today’s: Dor and Gopaldas Neeraj’s Poems – The whole world becomes Banjara

                
                                                             
                            अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- डोर, जिसका अर्थ है- पतला तागा, डोरा, सहारा या आसरा। प्रस्तुत है गोपालदास नीरज की कविता- सारा जग बंजारा होता...
                                                                     
                            

प्यार अगर थामता न पथ में उँगली इस बीमार उमर की 
हर पीड़ा वेश्या बन जाती, हर आँसू आवारा होता। 

निरवंशी रहता उजियाला 
गोद न भरती किसी किरन की, 
और ज़िंदगी लगती जैसे— 
डोली कोई बिना दुल्हन की 
दुख से सब बस्ती कराहती, लपटों में हर फूल झुलसता 
करुणा ने जाकर नफ़रत का आँगन गर न बुहारा होता। 
प्यार अगर... 

मन तो मौसम-सा चंचल है 
सबका होकर भी न किसी का 
अभी सुबह का, अभी शाम का 
अभी रुदन का, अभी हँसी का 
और इसी भौंरे की ग़लती क्षमा न यदि ममता कर देती 
ईश्वर तक अपराधी होता पूरा खेल दुबारा होता। 
प्यार अगर... 

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5 minutes ago

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